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mahabharat 6.55.d1-d2: तत्पश्चात् सोमक, पांचाल और पाण्डव योद्धा रथ, हाथी और घोड़ों सहित विजय पाकर बारम्बार गर्जना करने लगे। वे सभी महारथी विजयसूचक बाजे बजाते हुए बड़े हर्ष से नाचने लगे और अर्जुन को आगे करके शिविर की ओर चल पड़े।   |   mahabharat अध्याय 6.55: अभिमन्यु और अर्जुनका पराक्रम तथा दूसरे दिनके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 55: अभिमन्यु और अर्जुनका पराक्रम तथा दूसरे दिनके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक d1-d2
 
 
श्लोक  6.55.d1-d2 
(तत: सरथनागाश्वा जयं प्राप्य ससोमका:।
पञ्चाला: पाण्डवाश्चैव प्रणेदुश्च पुन: पुन:॥
प्रययु: शिबिरायैव धनंजयपुरस्कृता:।
वादित्रघोषै: संहृष्टा: प्रनृत्यन्तो महारथा:॥ )
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् सोमक, पांचाल और पाण्डव योद्धा रथ, हाथी और घोड़ों सहित विजय पाकर बारम्बार गर्जना करने लगे। वे सभी महारथी विजयसूचक बाजे बजाते हुए बड़े हर्ष से नाचने लगे और अर्जुन को आगे करके शिविर की ओर चल पड़े।
 
Thereafter, Somaka, Panchala and Pandava warriors along with chariots, elephants and horses started roaring repeatedly after getting victory. All those great warriors started dancing in great joy with the sound of victory-indicating instruments and proceeded towards the camp with Arjuna in front.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)