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श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 55: अभिमन्यु और अर्जुनका पराक्रम तथा दूसरे दिनके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  6.55.38 
न ह्येष समरे शक्यो विजेतुं हि कथंचन।
यथास्य दृश्यते रूपं कालान्तकयमोपमम्॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
‘उसे रणभूमि में किसी भी प्रकार से पराजित नहीं किया जा सकता; क्योंकि इस समय उसका स्वरूप प्रलयकाल के यमराज के समान प्रतीत हो रहा है।
 
‘He cannot be defeated in the battlefield by any means; because at this moment his form is looking like that of Yamaraja at the time of doomsday.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)