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श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 55: अभिमन्यु और अर्जुनका पराक्रम तथा दूसरे दिनके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  6.55.34 
यो यो हि समरे पार्थं प्रत्युद्याति विशाम्पते।
स संख्ये विशिखैस्तीक्ष्णै: परलोकाय नीयते॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
हे प्रजानाथ! उस युद्धस्थल में जो कोई अर्जुन की ओर बढ़ता, वह अर्जुन के तीखे बाणों द्वारा परलोक सिधार जाता।
 
O Prajanath! On that battlefield whoever advanced towards Arjuna was sent to the next world by his sharp arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)