Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.55.29-32: आर्य! भरतपुत्र! राजा! उस युद्धभूमि में गिरी हुई प्रज्वलित तलवारें, गदाएँ, भाले, भिन्दिपाल, तलवारें, कुल्हाड़ी, तीखे भाले, स्वर्ण कवच, ध्वजाएँ, ढालें, स्वर्ण दण्डों से विभूषित छत्र, पात्र, चाबुक, जूए, चाबुक और अंकुश आदि ढेरों में बिखरे हुए दिखाई दे रहे थे। | mahabharat अध्याय 6.55: अभिमन्यु और अर्जुनका पराक्रम तथा दूसरे दिनके युद्धकी समाप्ति । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
परिघाणां प्रदीप्तानां मुद्गराणां च मारिष।
प्रासानां भिन्दिपालानां निस्त्रिंशानां च संयुगे॥ २९॥
परश्वधानां तीक्ष्णानां तोमराणां च भारत।
वर्मणां चापविद्धानां काञ्चनानां च भूमिप॥ ३०॥
ध्वजानां चर्मणां चैव व्यजनानां च सर्वश:।
छत्राणां हेमदण्डानां तोमराणां च भारत॥ ३१॥
प्रतोदानां च योक्त्राणां कशानां चैव मारिष।
राशय: स्मात्र दृश्यन्ते विनिकीर्णा रणक्षितौ॥ ३२॥
अनुवाद
आर्य! भरतपुत्र! राजा! उस युद्धभूमि में गिरी हुई प्रज्वलित तलवारें, गदाएँ, भाले, भिन्दिपाल, तलवारें, कुल्हाड़ी, तीखे भाले, स्वर्ण कवच, ध्वजाएँ, ढालें, स्वर्ण दण्डों से विभूषित छत्र, पात्र, चाबुक, जूए, चाबुक और अंकुश आदि ढेरों में बिखरे हुए दिखाई दे रहे थे।
Arya! Son of Bharat! King! On that battlefield, the fallen blazing swords, maces, spears, Bhindipals, swords, axes, sharp spears, golden armour, flags, shields, umbrellas decorated with golden rods, utensils, whips, yokes, whips and goads were seen scattered in heaps.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥