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mahabharat 6.55.19: उस समय हाथी, घोड़े, रथ और पैदलों द्वारा उड़ाई हुई पृथ्वी की मोटी धूल सहसा सूर्य के रथ पर पहुँच गई और सर्वत्र व्याप्त होती हुई प्रतीत हुई॥19॥   |   mahabharat अध्याय 6.55: अभिमन्यु और अर्जुनका पराक्रम तथा दूसरे दिनके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 55: अभिमन्यु और अर्जुनका पराक्रम तथा दूसरे दिनके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  6.55.19 
उद्भूतं सहसा भौमं नागाश्वरथपत्तिभि:।
दिवाकररथं प्राप्य रजस्तीव्रमदृश्यत॥ १९॥
 
 
अनुवाद
उस समय हाथी, घोड़े, रथ और पैदलों द्वारा उड़ाई हुई पृथ्वी की मोटी धूल सहसा सूर्य के रथ पर पहुँच गई और सर्वत्र व्याप्त होती हुई प्रतीत हुई॥19॥
 
At that time the thick dust from the earth raised by the elephants, horses, chariots and infantry suddenly reached the Sun's chariot and appeared to be pervading everywhere.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)