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mahabharat 6.55.12: शत्रुवीरों का संहार करने वाले सुभद्रापुत्र ने टूटे हुए धनुष को फेंककर दूसरा विचित्र धनुष उठाया, जो अत्यंत शक्तिशाली था ॥12॥   |   mahabharat अध्याय 6.55: अभिमन्यु और अर्जुनका पराक्रम तथा दूसरे दिनके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 55: अभिमन्यु और अर्जुनका पराक्रम तथा दूसरे दिनके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  6.55.12 
तद् विहाय धनुश्छिन्नं सौभद्र: परवीरहा।
अन्यदादत्तवांश्चित्रं कार्मुकं वेगवत्तरम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
शत्रुवीरों का संहार करने वाले सुभद्रापुत्र ने टूटे हुए धनुष को फेंककर दूसरा विचित्र धनुष उठाया, जो अत्यंत शक्तिशाली था ॥12॥
 
Throwing away the broken bow, the son of Subhadra, that slayer of enemy warriors, took up another strange bow, which was extremely powerful. ॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)