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mahabharat 6.55.10: महाराज! भरतश्रेष्ठ! यह देखकर वीर अभिमन्यु, जो शीघ्रता से हाथ चलाता था, अत्यन्त क्रोधित हो गया और उसने अपने भाई लक्ष्मण को पचास बाणों से घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 6.55: अभिमन्यु और अर्जुनका पराक्रम तथा दूसरे दिनके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 55: अभिमन्यु और अर्जुनका पराक्रम तथा दूसरे दिनके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  6.55.10 
अभिमन्यु: सुसंक्रुद्धो भ्रातरं भरतर्षभ।
शरै: पञ्चाशता राजन् क्षिप्रहस्तोऽभ्यविध्यत॥ १०॥
 
 
अनुवाद
महाराज! भरतश्रेष्ठ! यह देखकर वीर अभिमन्यु, जो शीघ्रता से हाथ चलाता था, अत्यन्त क्रोधित हो गया और उसने अपने भाई लक्ष्मण को पचास बाणों से घायल कर दिया।
 
Maharaja! Best of the Bharatas! Seeing this, the brave Abhimanyu, who was quick to move his hands, became very angry and wounded his brother Lakshmana with fifty arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)