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mahabharat 6.55.1-2: संजय कहते हैं - भरत! दूसरे दिन जब पूर्वान्ह का अधिकांश समय बीत चुका था और बहुत से रथों, हाथियों, घोड़ों, पैदलों और घुड़सवारों का महान संहार होने लगा था, उस समय पांचालराज धृष्टद्युम्न अकेले ही द्रोणपुत्र अश्वत्थामा, शल्य और महाहृदयी कृपाचार्य - इन तीन महारथियों के साथ युद्ध करने लगे।॥ 1-2॥   |   mahabharat अध्याय 6.55: अभिमन्यु और अर्जुनका पराक्रम तथा दूसरे दिनके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 55: अभिमन्यु और अर्जुनका पराक्रम तथा दूसरे दिनके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  6.55.1-2 
संजय उवाच
गतपूर्वाह्णभूयिष्ठे तस्मिन्नहनि भारत।
रथनागाश्वपत्तीनां सादिनां च महाक्षये॥ १॥
द्रोणपुत्रेण शल्येन कृपेण च महात्मना।
समसज्जत पाञ्चाल्यस्त्रिभिरेतैर्महारथै:॥ २॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - भरत! दूसरे दिन जब पूर्वान्ह का अधिकांश समय बीत चुका था और बहुत से रथों, हाथियों, घोड़ों, पैदलों और घुड़सवारों का महान संहार होने लगा था, उस समय पांचालराज धृष्टद्युम्न अकेले ही द्रोणपुत्र अश्वत्थामा, शल्य और महाहृदयी कृपाचार्य - इन तीन महारथियों के साथ युद्ध करने लगे।॥ 1-2॥
 
Sanjaya says - Bharata! On the second day when the major part of the forenoon had passed and a great slaughter of a large number of chariots, elephants, horses, infantry and horsemen had begun, at that time the prince of Panchala, Dhrishtadyumna, alone began to fight with these three great warriors - Drona's son Ashwatthama, Shalya and the great-hearted Kripacharya.॥ 1-2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)