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mahabharat 6.54.95: पांचाल नरेश धृष्टद्युम्न के लिए भीम और सात्यकि के अतिरिक्त संसार में कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं था जो उसके प्राणों से अधिक मूल्यवान था।   |   mahabharat अध्याय 6.54: भीमसेनका कलिंगों और निषादोंसे युद्ध, भीमसेनके द्वारा शक्रदेव, भानुमान् और केतुमान‍्का वध तथा उनके बहुत-से सैनिकोंका संहार   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 54: भीमसेनका कलिंगों और निषादोंसे युद्ध, भीमसेनके द्वारा शक्रदेव, भानुमान् और केतुमान‍्का वध तथा उनके बहुत-से सैनिकोंका संहार  »  श्लोक 95
 
 
श्लोक  6.54.95 
न हि पञ्चालराजस्य लोके कश्चन विद्यते।
भीमसात्यकयोरन्य: प्राणेभ्य: प्रियकृत्तम:॥ ९५॥
 
 
अनुवाद
पांचाल नरेश धृष्टद्युम्न के लिए भीम और सात्यकि के अतिरिक्त संसार में कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं था जो उसके प्राणों से अधिक मूल्यवान था।
 
For the King of Panchalas Dhrishtadyumna there was no man in the world who was more precious than his life except Bhima and Satyaki.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)