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mahabharat 6.54.83-84: उस रणभूमि में जब पाण्डवपुत्र भीमसेन ने घुड़सवारों को मार डाला, तब बाणों की पीड़ा से व्याकुल होकर बहुत से पागल हाथी, वायु से उड़ते हुए बादलों के समान कौरव सेना में इधर-उधर दौड़ने लगे और अपने ही सैनिकों को कुचलने लगे।   |   mahabharat अध्याय 6.54: भीमसेनका कलिंगों और निषादोंसे युद्ध, भीमसेनके द्वारा शक्रदेव, भानुमान् और केतुमान‍्का वध तथा उनके बहुत-से सैनिकोंका संहार   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 54: भीमसेनका कलिंगों और निषादोंसे युद्ध, भीमसेनके द्वारा शक्रदेव, भानुमान् और केतुमान‍्का वध तथा उनके बहुत-से सैनिकोंका संहार  »  श्लोक 83-84
 
 
श्लोक  6.54.83-84 
हतारोहाश्च मातङ्गा: पाण्डवेन कृता रणे॥ ८३॥
विप्रजग्मुरनीकेषु मेघा वातहता इव।
मृद्नन्त: स्वान्यनीकानि विनदन्त: शरातुरा:॥ ८४॥
 
 
अनुवाद
उस रणभूमि में जब पाण्डवपुत्र भीमसेन ने घुड़सवारों को मार डाला, तब बाणों की पीड़ा से व्याकुल होकर बहुत से पागल हाथी, वायु से उड़ते हुए बादलों के समान कौरव सेना में इधर-उधर दौड़ने लगे और अपने ही सैनिकों को कुचलने लगे।
 
When the horsemen were killed by Bhima, son of Pandava, on that battlefield, many mad elephants, distraught by the pain of the arrows, began running here and there in the Kaurava army like clouds tossed by the wind and trampling their own soldiers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)