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mahabharat 6.54.57: कहीं कटे हुए हाथियों के शरीर के ऊपरी भाग पड़े थे, कहीं उनके निचले भाग। कहीं कटे हुए धड़ पड़े थे और कहीं मृत हाथियों के शव पड़े थे। उनसे आच्छादित युद्धभूमि ऐसी प्रतीत हो रही थी मानो गिरे हुए पर्वतों से ढकी हो। 57.   |   mahabharat अध्याय 6.54: भीमसेनका कलिंगों और निषादोंसे युद्ध, भीमसेनके द्वारा शक्रदेव, भानुमान् और केतुमान‍्का वध तथा उनके बहुत-से सैनिकोंका संहार   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 54: भीमसेनका कलिंगों और निषादोंसे युद्ध, भीमसेनके द्वारा शक्रदेव, भानुमान् और केतुमान‍्का वध तथा उनके बहुत-से सैनिकोंका संहार  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  6.54.57 
छिन्नगात्रावरकरैर्निहतैश्चापि वारणै:।
आसीद् भूमि: समास्तीर्णा पतितैर्भूधरैरिव॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
कहीं कटे हुए हाथियों के शरीर के ऊपरी भाग पड़े थे, कहीं उनके निचले भाग। कहीं कटे हुए धड़ पड़े थे और कहीं मृत हाथियों के शव पड़े थे। उनसे आच्छादित युद्धभूमि ऐसी प्रतीत हो रही थी मानो गिरे हुए पर्वतों से ढकी हो। 57.
 
Somewhere the upper parts of the bodies of the cut elephants were lying, somewhere their lower parts were lying. Somewhere the cut trunks were lying and somewhere the carcasses of the dead elephants were lying. The battlefield covered with them looked like it was covered with fallen mountains. 57.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)