Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.54.53-56: महाराज! हमने वहाँ देखा कि अनेक महावतों और तोमरों के सिर कटकर गिर पड़े थे। हाथियों की पीठों पर विचित्र झूले बिछे हुए थे। हाथियों को बाँधने के लिए उपयोग की जाने वाली स्वर्ण-सज्जित चमकदार रस्सियाँ नीचे पड़ी थीं। हाथियों और घोड़ों के गले के आभूषण, भाले, ध्वजाएँ, कनप (विशेष अस्त्र), तरकश, विचित्र वाद्य, धनुष, चमकदार भिंडीपाल, ताबीज, अंकुश, नाना प्रकार की घंटियाँ और स्वर्णजटित तलवारें और मुट्ठियाँ - ये सभी वस्तुएँ हाथी सवारों के साथ नीचे पड़ी थीं और अब भी गिर रही हैं। | mahabharat अध्याय 6.54: भीमसेनका कलिंगों और निषादोंसे युद्ध, भीमसेनके द्वारा शक्रदेव, भानुमान् और केतुमान्का वध तथा उनके बहुत-से सैनिकोंका संहार । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
महाराज! हमने वहाँ देखा कि अनेक महावतों और तोमरों के सिर कटकर गिर पड़े थे। हाथियों की पीठों पर विचित्र झूले बिछे हुए थे। हाथियों को बाँधने के लिए उपयोग की जाने वाली स्वर्ण-सज्जित चमकदार रस्सियाँ नीचे पड़ी थीं। हाथियों और घोड़ों के गले के आभूषण, भाले, ध्वजाएँ, कनप (विशेष अस्त्र), तरकश, विचित्र वाद्य, धनुष, चमकदार भिंडीपाल, ताबीज, अंकुश, नाना प्रकार की घंटियाँ और स्वर्णजटित तलवारें और मुट्ठियाँ - ये सभी वस्तुएँ हाथी सवारों के साथ नीचे पड़ी थीं और अब भी गिर रही हैं।
King! We saw there that the heads of many mahouts and tomars had been cut off and fallen down. Strange swings were spread on the backs of the elephants. The golden decorated shiny ropes used to tether the elephants were lying down. The neck ornaments of the elephants and horses, the spears, flags, kanpas (special weapons), quivers, strange instruments, bows, shiny bhindipalas, talismans, goads, different kinds of bells and golden studded swords and fists - all these things were lying down along with the elephant riders and are still falling.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥