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mahabharat 6.54.46-47h: उस युद्धस्थल में वह हाथी पर सवार होकर अपनी तीक्ष्ण तलवार से युद्ध करने वाले योद्धाओं के सिर काटता हुआ अकेला क्रोध में घूमता और शत्रुओं का भय बढ़ाता था। उसने प्रलयकाल में यमराज के समान भयानक रूप धारण करके शत्रुओं में भय उत्पन्न कर दिया था।   |   mahabharat अध्याय 6.54: भीमसेनका कलिंगों और निषादोंसे युद्ध, भीमसेनके द्वारा शक्रदेव, भानुमान् और केतुमान‍्का वध तथा उनके बहुत-से सैनिकोंका संहार   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 54: भीमसेनका कलिंगों और निषादोंसे युद्ध, भीमसेनके द्वारा शक्रदेव, भानुमान् और केतुमान‍्का वध तथा उनके बहुत-से सैनिकोंका संहार  »  श्लोक 46-47h
 
 
श्लोक  6.54.46-47h 
खड्गेन शितधारेण संयुगे गजयोधिनाम्।
पदातिरेक: संक्रुद्ध: शत्रूणां भयवर्धन:॥ ४६॥
सम्मोहयामास स तान् कालान्तकयमोपम:।
 
 
अनुवाद
उस युद्धस्थल में वह हाथी पर सवार होकर अपनी तीक्ष्ण तलवार से युद्ध करने वाले योद्धाओं के सिर काटता हुआ अकेला क्रोध में घूमता और शत्रुओं का भय बढ़ाता था। उसने प्रलयकाल में यमराज के समान भयानक रूप धारण करके शत्रुओं में भय उत्पन्न कर दिया था।
 
In that battle-field, riding on an elephant, he would cut off the heads of the warriors fighting with his sharp sword and roam around alone in anger and increase the fear of the enemies. He assumed a terrifying form like Yamaraja at the time of doomsday and instilled fear in all of them. 46 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)