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mahabharat 6.54.23-24h: जिस रथ के घोड़े मारे गए थे, उसी पर खड़े होकर महाबली भीमसेन ने अपनी गदा, जो पूर्णतः लौह तत्त्व से बनी थी, भगवान शिव पर तान दी।   |   mahabharat अध्याय 6.54: भीमसेनका कलिंगों और निषादोंसे युद्ध, भीमसेनके द्वारा शक्रदेव, भानुमान् और केतुमान‍्का वध तथा उनके बहुत-से सैनिकोंका संहार   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 54: भीमसेनका कलिंगों और निषादोंसे युद्ध, भीमसेनके द्वारा शक्रदेव, भानुमान् और केतुमान‍्का वध तथा उनके बहुत-से सैनिकोंका संहार  »  श्लोक 23-24h
 
 
श्लोक  6.54.23-24h 
हताश्वे तु रथे तिष्ठन् भीमसेनो महाबल:॥ २३॥
शक्रदेवाय चिक्षेप सर्वशैक्यायसीं गदाम्।
 
 
अनुवाद
जिस रथ के घोड़े मारे गए थे, उसी पर खड़े होकर महाबली भीमसेन ने अपनी गदा, जो पूर्णतः लौह तत्त्व से बनी थी, भगवान शिव पर तान दी।
 
Standing on the same chariot whose horses had been killed, the mighty Bhimasena aimed his mace, made entirely of the essence of iron, at Lord Shiva. 23 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)