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mahabharat 6.54.22-23h: राजेन्द्र! जैसे ग्रीष्म ऋतु के अन्त में बादल जल की बूँदें बरसाते हैं, उसी प्रकार महाबली शक्रदेव भीमसेन पर बाणों की वर्षा करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 6.54: भीमसेनका कलिंगों और निषादोंसे युद्ध, भीमसेनके द्वारा शक्रदेव, भानुमान् और केतुमान‍्का वध तथा उनके बहुत-से सैनिकोंका संहार   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 54: भीमसेनका कलिंगों और निषादोंसे युद्ध, भीमसेनके द्वारा शक्रदेव, भानुमान् और केतुमान‍्का वध तथा उनके बहुत-से सैनिकोंका संहार  »  श्लोक 22-23h
 
 
श्लोक  6.54.22-23h 
भीमस्योपरि राजेन्द्र शक्रदेवो महाबल:॥ २२॥
ववर्ष शरवर्षाणि तपान्ते जलदो यथा।
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! जैसे ग्रीष्म ऋतु के अन्त में बादल जल की बूँदें बरसाते हैं, उसी प्रकार महाबली शक्रदेव भीमसेन पर बाणों की वर्षा करने लगे।
 
Rajendra! Just as the clouds shower drops of water at the end of summer, in the same way the mighty Shakradev began to shower arrows on Bhimasena.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)