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mahabharat 6.54.16-17: जब चेदि सैनिक भाग गये, तब सारा कलिंग भीमसेन के पास आ गया; तब भी पराक्रमी पाण्डवपुत्र भीमसेन अपने बाहुबल पर भरोसा करके पीछे नहीं हटे और अपने रथ के आसन से तनिक भी विचलित नहीं हुए।   |   mahabharat अध्याय 6.54: भीमसेनका कलिंगों और निषादोंसे युद्ध, भीमसेनके द्वारा शक्रदेव, भानुमान् और केतुमान‍्का वध तथा उनके बहुत-से सैनिकोंका संहार   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 54: भीमसेनका कलिंगों और निषादोंसे युद्ध, भीमसेनके द्वारा शक्रदेव, भानुमान् और केतुमान‍्का वध तथा उनके बहुत-से सैनिकोंका संहार  »  श्लोक 16-17
 
 
श्लोक  6.54.16-17 
सर्वै: कलिङ्गैरासन्न: संनिवृत्तेषु चेदिषु॥ १६॥
स्वबाहुबलमास्थाय न न्यवर्तत पाण्डव:।
न चचाल रथोपस्थाद् भीमसेनो महाबल:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
जब चेदि सैनिक भाग गये, तब सारा कलिंग भीमसेन के पास आ गया; तब भी पराक्रमी पाण्डवपुत्र भीमसेन अपने बाहुबल पर भरोसा करके पीछे नहीं हटे और अपने रथ के आसन से तनिक भी विचलित नहीं हुए।
 
When the Chedi soldiers fled, the whole of Kalinga came near Bhimasena; even then the mighty Pandava son Bhimasena did not retreat relying on his physical strength and did not get disturbed even a bit from his chariot seat.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)