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mahabharat 6.54.13-14h: अत्यन्त अजेय वीर योद्धा अपने विरोधियों को मारने के लिए इतने आतुर रहते थे कि उन्हें अपने-पराये का भेद भी नहीं रहता था। प्रायः अपने ही पक्ष के योद्धा अपने ही योद्धाओं को पकड़कर मार डालते थे।॥13 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 6.54: भीमसेनका कलिंगों और निषादोंसे युद्ध, भीमसेनके द्वारा शक्रदेव, भानुमान् और केतुमान‍्का वध तथा उनके बहुत-से सैनिकोंका संहार   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 54: भीमसेनका कलिंगों और निषादोंसे युद्ध, भीमसेनके द्वारा शक्रदेव, भानुमान् और केतुमान‍्का वध तथा उनके बहुत-से सैनिकोंका संहार  »  श्लोक 13-14h
 
 
श्लोक  6.54.13-14h 
योधांश्च स्वान् परान् वापि नाभ्यजानञ्जिघांसया॥ १३॥
स्वानप्याददते स्वाश्च शूरा: परमदुर्जया:।
 
 
अनुवाद
अत्यन्त अजेय वीर योद्धा अपने विरोधियों को मारने के लिए इतने आतुर रहते थे कि उन्हें अपने-पराये का भेद भी नहीं रहता था। प्रायः अपने ही पक्ष के योद्धा अपने ही योद्धाओं को पकड़कर मार डालते थे।॥13 1/2॥
 
The most invincible brave soldiers were so eager to kill their opponents that they could not even distinguish between their own and others. Often the soldiers of their own side would capture their own warriors to kill them.॥ 13 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)