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mahabharat 6.54.123-124h: ऐसा कहकर महाबाहु सात्यकि अपने रथ से कूद पड़े और भीमसेन के रथ पर चढ़कर उन्हें गले लगा लिया ॥123 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 6.54: भीमसेनका कलिंगों और निषादोंसे युद्ध, भीमसेनके द्वारा शक्रदेव, भानुमान् और केतुमान‍्का वध तथा उनके बहुत-से सैनिकोंका संहार   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 54: भीमसेनका कलिंगों और निषादोंसे युद्ध, भीमसेनके द्वारा शक्रदेव, भानुमान् और केतुमान‍्का वध तथा उनके बहुत-से सैनिकोंका संहार  »  श्लोक 123-124h
 
 
श्लोक  6.54.123-124h 
एवमुक्त्वा शिनेर्नप्ता दीर्घबाहुररिंदम॥ १२३॥
रथाद् रथमभिद्रुत्य पर्यष्वजत पाण्डवम्।
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर महाबाहु सात्यकि अपने रथ से कूद पड़े और भीमसेन के रथ पर चढ़कर उन्हें गले लगा लिया ॥123 1/2॥
 
Saying this, the big-armed Satyaki jumped from his chariot and climbed onto Bhimasena's chariot and embraced him. ॥123 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)