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mahabharat 6.54.111: घोड़ों के मारे जाने पर भी उसी रथ पर खड़े होकर वीर भीमसेन ने भीष्म के रथ पर एक शक्तिशाली बाण चलाया।   |   mahabharat अध्याय 6.54: भीमसेनका कलिंगों और निषादोंसे युद्ध, भीमसेनके द्वारा शक्रदेव, भानुमान् और केतुमान‍्का वध तथा उनके बहुत-से सैनिकोंका संहार   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 54: भीमसेनका कलिंगों और निषादोंसे युद्ध, भीमसेनके द्वारा शक्रदेव, भानुमान् और केतुमान‍्का वध तथा उनके बहुत-से सैनिकोंका संहार  »  श्लोक 111
 
 
श्लोक  6.54.111 
हताश्वे स रथे तिष्ठन् भीमसेन: प्रतापवान्।
शक्तिं चिक्षेप तरसा गाङ्गेयस्य रथं प्रति॥ १११॥
 
 
अनुवाद
घोड़ों के मारे जाने पर भी उसी रथ पर खड़े होकर वीर भीमसेन ने भीष्म के रथ पर एक शक्तिशाली बाण चलाया।
 
Standing on the same chariot even after the horses were killed, the valiant Bhimasena fired a powerful arrow at Bhishma's chariot.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)