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mahabharat 6.54.110: तत्पश्चात् भीष्म ने उन तीनों महारथियों पर हजारों बाणों की वर्षा करके उन्हें रोक दिया और अपने बाणों से भीमसेन के सुवर्णमय आभूषणों से विभूषित घोड़ों को मार डाला॥110॥   |   mahabharat अध्याय 6.54: भीमसेनका कलिंगों और निषादोंसे युद्ध, भीमसेनके द्वारा शक्रदेव, भानुमान् और केतुमान‍्का वध तथा उनके बहुत-से सैनिकोंका संहार   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 54: भीमसेनका कलिंगों और निषादोंसे युद्ध, भीमसेनके द्वारा शक्रदेव, भानुमान् और केतुमान‍्का वध तथा उनके बहुत-से सैनिकोंका संहार  »  श्लोक 110
 
 
श्लोक  6.54.110 
तत: शरसहस्रेण संनिवार्य महारथान्।
हयान् काञ्चनसंनाहान् भीमस्य न्यहनच्छरै:॥ ११०॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् भीष्म ने उन तीनों महारथियों पर हजारों बाणों की वर्षा करके उन्हें रोक दिया और अपने बाणों से भीमसेन के सुवर्णमय आभूषणों से विभूषित घोड़ों को मार डाला॥110॥
 
Thereafter, Bhishma stopped those three mighty warriors by showering thousands of arrows on them and killed with his arrows Bhimasena's horses adorned with golden ornaments.॥ 110॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)