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mahabharat 6.54.11-12h: हे भरतपुत्र! युद्धभूमि में कलिंग सेना का जो महान् कोलाहल हो रहा था, वह समुद्र की गर्जना के समान प्रतीत हो रहा था।   |   mahabharat अध्याय 6.54: भीमसेनका कलिंगों और निषादोंसे युद्ध, भीमसेनके द्वारा शक्रदेव, भानुमान् और केतुमान‍्का वध तथा उनके बहुत-से सैनिकोंका संहार   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 54: भीमसेनका कलिंगों और निषादोंसे युद्ध, भीमसेनके द्वारा शक्रदेव, भानुमान् और केतुमान‍्का वध तथा उनके बहुत-से सैनिकोंका संहार  »  श्लोक 11-12h
 
 
श्लोक  6.54.11-12h 
तस्य सैन्यस्य संग्रामे युध्यमानस्य भारत॥ ११॥
बभूव सुमहान् शब्द: सागरस्येव गर्जत:।
 
 
अनुवाद
हे भरतपुत्र! युद्धभूमि में कलिंग सेना का जो महान् कोलाहल हो रहा था, वह समुद्र की गर्जना के समान प्रतीत हो रहा था।
 
O son of Bharata! The great noise made by the Kalinga army fighting on the battlefield seemed like the roar of the ocean. 11 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)