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mahabharat 6.54.100: उस युद्धस्थल में वीर धृष्टद्युम्न और भीमसेन ने दूर से ही सात्यकि को आते देखा; अतएव वे अधिक उत्साह से भरकर कलिंगों से युद्ध करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 6.54: भीमसेनका कलिंगों और निषादोंसे युद्ध, भीमसेनके द्वारा शक्रदेव, भानुमान् और केतुमान‍्का वध तथा उनके बहुत-से सैनिकोंका संहार   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 54: भीमसेनका कलिंगों और निषादोंसे युद्ध, भीमसेनके द्वारा शक्रदेव, भानुमान् और केतुमान‍्का वध तथा उनके बहुत-से सैनिकोंका संहार  »  श्लोक 100
 
 
श्लोक  6.54.100 
तौ दूरात् सात्यकिं दृष्ट्वा धृष्टद्युम्नवृकोदरौ।
कलिङ्गान् समरे वीरौ योधयेतां मनस्विनौ॥ १००॥
 
 
अनुवाद
उस युद्धस्थल में वीर धृष्टद्युम्न और भीमसेन ने दूर से ही सात्यकि को आते देखा; अतएव वे अधिक उत्साह से भरकर कलिंगों से युद्ध करने लगे।
 
In that battle-field, the brave Dhrishtadyumna and Bhimasena saw Satyaki approaching from a distance; hence, filled with greater enthusiasm, they began to fight with the Kalingas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)