Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.54.10-11h: महाराज! उस समय सब योद्धा एक-दूसरे को मारने की इच्छा से अपने-पराए का भेद न कर सके। शत्रुओं के साथ भीमसेन का वह युद्ध सहसा अत्यन्त भयंकर हो गया, मानो देवराज इन्द्र का दैत्यों की विशाल सेना के साथ युद्ध हो रहा हो॥10 1/2॥ | mahabharat अध्याय 6.54: भीमसेनका कलिंगों और निषादोंसे युद्ध, भीमसेनके द्वारा शक्रदेव, भानुमान् और केतुमान्का वध तथा उनके बहुत-से सैनिकोंका संहार । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न प्राजानन्त योधा: स्वान् परस्परजिघांसया।
घोरमासीत् ततो युद्धं भीमस्य सहसा परै:॥ १०॥
यथेन्द्रस्य महाराज महत्या दैत्यसेनया।
अनुवाद
महाराज! उस समय सब योद्धा एक-दूसरे को मारने की इच्छा से अपने-पराए का भेद न कर सके। शत्रुओं के साथ भीमसेन का वह युद्ध सहसा अत्यन्त भयंकर हो गया, मानो देवराज इन्द्र का दैत्यों की विशाल सेना के साथ युद्ध हो रहा हो॥10 1/2॥
Maharaj! At that time, all the warriors were unable to distinguish between their own and others due to the desire to kill each other. That battle of Bhimasena with the enemies suddenly became extremely fierce, just like the battle of Devraj Indra with a huge army of demons.॥ 10 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥