श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 53: धृष्टद्युम्न तथा द्रोणाचार्यका युद्ध  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  6.53.7 
धृष्टद्युम्नस्ततो द्रोणं नवत्या निशितै: शरै:।
विव्याध प्रहसन् वीरस्तिष्ठ तिष्ठेति चाब्रवीत्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
तब धृष्टद्युम्न ने मुस्कुराते हुए द्रोणाचार्य को नब्बे तीखे बाणों से बींध डाला और कहा, 'खड़े हो जाओ, खड़े हो जाओ।'
 
Then Dhrishtadyumna smilingly pierced Dronacharya with ninety sharp arrows and said, 'Stand, stand.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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