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mahabharat 6.53.30-31: तदनन्तर सुन्दर भुजाओं वाले बलवान योद्धा धृष्टद्युम्न ने हाथ में सौ चन्द्रमा के पुष्पों से सुशोभित चमकती हुई चौड़ी ढाल तथा एक दिव्य एवं विशाल तलवार लेकर द्रोणाचार्य को मार डालने की इच्छा से उन पर बड़े जोर से आक्रमण किया, जैसे वन में मांस की लालसा रखने वाला सिंह मतवाले हाथी पर आक्रमण करता है।   |   mahabharat अध्याय 6.53: धृष्टद्युम्न तथा द्रोणाचार्यका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 53: धृष्टद्युम्न तथा द्रोणाचार्यका युद्ध  »  श्लोक 30-31
 
 
श्लोक  6.53.30-31 
तत: स विपुलं चर्म शतचन्द्रं च भानुमत्।
खड्गं च विपुलं दिव्यं प्रगृह्य सुभुजो बली॥ ३०॥
अभिदुद्राव वेगेन द्रोणस्य वधकाङ्क्षया।
आमिषार्थी यथा सिंहो वने मत्तमिव द्विपम्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर सुन्दर भुजाओं वाले बलवान योद्धा धृष्टद्युम्न ने हाथ में सौ चन्द्रमा के पुष्पों से सुशोभित चमकती हुई चौड़ी ढाल तथा एक दिव्य एवं विशाल तलवार लेकर द्रोणाचार्य को मार डालने की इच्छा से उन पर बड़े जोर से आक्रमण किया, जैसे वन में मांस की लालसा रखने वाला सिंह मतवाले हाथी पर आक्रमण करता है।
 
Then the strong warrior Dhrishtadyumna with beautiful arms, holding in his hand a shining and broad shield decorated with a hundred moon-shaped flowers and a divine and huge sword, attacked Drona with great force with the intention of killing him, just like a lion seeking meat attacks a drunken elephant in the forest.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)