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mahabharat 6.53.26-27: उसी समय उसने भाले से धृष्टद्युम्न के सारथि को रथ के आसन से नीचे गिरा दिया और चार तीखे बाणों से उसके चारों घोड़ों को मार डाला। फिर वह रणभूमि में बड़े जोर से गर्जना करने लगा। इतना ही नहीं, उसने दूसरे बाण से उसके हाथ में जो दूसरा धनुष था, उसे भी काट डाला॥26-27॥   |   mahabharat अध्याय 6.53: धृष्टद्युम्न तथा द्रोणाचार्यका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 53: धृष्टद्युम्न तथा द्रोणाचार्यका युद्ध  »  श्लोक 26-27
 
 
श्लोक  6.53.26-27 
सारथिं चास्य भल्लेन रथनीडादपातयत्।
अथास्य चतुरो वाहांश्चतुर्भिर्निशितै: शरै:॥ २६॥
पातयामास समरे सिंहनादं ननाद च।
ततोऽपरेण भल्लेन हस्ताच्चापमथाच्छिनत्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
उसी समय उसने भाले से धृष्टद्युम्न के सारथि को रथ के आसन से नीचे गिरा दिया और चार तीखे बाणों से उसके चारों घोड़ों को मार डाला। फिर वह रणभूमि में बड़े जोर से गर्जना करने लगा। इतना ही नहीं, उसने दूसरे बाण से उसके हाथ में जो दूसरा धनुष था, उसे भी काट डाला॥26-27॥
 
At the same time, he threw Dhrishtadyumna's charioteer down from the chariot seat with a spear and killed all his four horses with four sharp arrows. Then he started roaring loudly in the battlefield. Not only this, he also cut the other bow in his hand with another arrow.॥26-27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)