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mahabharat 6.53.25: तदनन्तर अपार आत्मविश्वास से युक्त द्रोणाचार्य ने कटे हुए धनुष वाले धृष्टद्युम्न पर झुकी हुई नोक वाले बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी, मानो कोई बादल पर्वत पर जल की बूँदें बरसा रहा हो।   |   mahabharat अध्याय 6.53: धृष्टद्युम्न तथा द्रोणाचार्यका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 53: धृष्टद्युम्न तथा द्रोणाचार्यका युद्ध  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  6.53.25 
अथैनं छिन्नधन्वानं शरै: संनतपर्वभि:।
अभ्यवर्षदमेयात्मा वृष्टॺा मेघ इवाचलम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर अपार आत्मविश्वास से युक्त द्रोणाचार्य ने कटे हुए धनुष वाले धृष्टद्युम्न पर झुकी हुई नोक वाले बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी, मानो कोई बादल पर्वत पर जल की बूँदें बरसा रहा हो।
 
Then Dronacharya, endowed with immeasurable self-confidence, began to shower arrows with bent tips on Dhrishtadyumna whose bow had been cut, as if a cloud was raining drops of water on a mountain.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)