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mahabharat 6.53.12: उस भयंकर और प्रज्वलित बाण को मृत्यु के समान अपनी ओर आते देख धृष्टद्युम्न ने तुरन्त ही उसे काट डाला और द्रोणाचार्य पर बाणों की वर्षा करने लगा॥12॥   |   mahabharat अध्याय 6.53: धृष्टद्युम्न तथा द्रोणाचार्यका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 53: धृष्टद्युम्न तथा द्रोणाचार्यका युद्ध  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  6.53.12 
तं च दीप्तं शरं घोरमायान्तं मृत्युमात्मन:।
चिच्छेद शरवृष्टिं च भारद्वाजे मुमोच ह॥ १२॥
 
 
अनुवाद
उस भयंकर और प्रज्वलित बाण को मृत्यु के समान अपनी ओर आते देख धृष्टद्युम्न ने तुरन्त ही उसे काट डाला और द्रोणाचार्य पर बाणों की वर्षा करने लगा॥12॥
 
Seeing that fierce and blazing arrow coming towards him like death, Dhrishtadyumna instantly cut it down and began showering arrows on Dronacharya.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)