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श्लोक 6.52.72  |
वर्तमाने तथा घोरे तस्मिन् युद्धे सुदारुणे।
द्रोणपाञ्चाल्ययो राजन् महानासीत् समागम:॥ ७२॥ |
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| अनुवाद |
| महाराज! एक ओर तो यह भयंकर एवं भयानक युद्ध चल रहा था, वहीं दूसरी ओर द्रोणाचार्य और धृष्टद्युम्न के बीच भीषण मुठभेड़ हो रही थी। |
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| King! While this terrible and dreadful battle was going on on one side, on the other side a fierce encounter was taking place between Dronacharya and Dhrishtadyumna. |
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इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि भीष्मवधपर्वणि भीष्मार्जुनयुद्धे द्विपञ्चाशत्तमोऽध्याय:॥ ५२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत भीष्मवधपर्वमें भीष्म और अर्जुनका युद्धविषयक बावनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५२॥
[दाक्षिणात्य अधिक पाठका १/२ श्लोक मिलाकर कुल ७२ १/२ श्लोक हैं।] |
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