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mahabharat 6.52.65-67h: यह अत्यंत अद्भुत युद्ध समस्त जगत के लिए एक आश्चर्यजनक घटना है। भविष्य में ऐसे युद्धों की कोई संभावना नहीं है। बुद्धिमान पार्थ युद्धभूमि में भीष्म को कभी नहीं हरा सकते; क्योंकि वे रथ, घोड़े और धनुष के साथ युद्धभूमि में उपस्थित हैं और बीज की तरह बाण बो रहे हैं। 65-66 1/2।   |   mahabharat अध्याय 6.52: भीष्म और अर्जुनका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 52: भीष्म और अर्जुनका युद्ध  »  श्लोक 65-67h
 
 
श्लोक  6.52.65-67h 
आश्चर्यभूतं लोकेषु युद्धमेतन्महाद्भुतम्॥ ६५॥
नैतादृशानि युद्धानि भविष्यन्ति कथञ्चन।
न हि शक्यो रणे जेतुं भीष्म: पार्थेन धीमता॥ ६६॥
सधनु: सरथ: साश्व: प्रवपन् सायकान् रणे।
 
 
अनुवाद
यह अत्यंत अद्भुत युद्ध समस्त जगत के लिए एक आश्चर्यजनक घटना है। भविष्य में ऐसे युद्धों की कोई संभावना नहीं है। बुद्धिमान पार्थ युद्धभूमि में भीष्म को कभी नहीं हरा सकते; क्योंकि वे रथ, घोड़े और धनुष के साथ युद्धभूमि में उपस्थित हैं और बीज की तरह बाण बो रहे हैं। 65-66 1/2।
 
This extremely wonderful war is a surprising event for the entire world. There is no possibility of such wars in the future. The wise Partha can never defeat Bhishma in the battlefield; because he is present in the battlefield with a chariot, horse and bow and is sowing arrows like seeds. 65-66 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)