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mahabharat 6.52.37-38h: प्रजानाथ! आपके कारण ही कर्ण ने भी शस्त्र त्याग दिए हैं और वह युद्धभूमि में अर्जुन से युद्ध नहीं कर रहा है। कर्ण सदैव मेरा भला चाहता है। हे गंगापुत्र! आपको ऐसा प्रयत्न करना चाहिए कि अर्जुन मारा जाए।॥37 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 6.52: भीष्म और अर्जुनका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 52: भीष्म और अर्जुनका युद्ध  »  श्लोक 37-38h
 
 
श्लोक  6.52.37-38h 
त्वत्कृते चैव कर्णोऽपि न्यस्तशस्त्रो विशाम्पते।
न युध्यति रणे पार्थं हितकाम: सदा मम॥ ३७॥
स तथा कुरु गाङ्गेय यथा हन्येत फाल्गुन:।
 
 
अनुवाद
प्रजानाथ! आपके कारण ही कर्ण ने भी शस्त्र त्याग दिए हैं और वह युद्धभूमि में अर्जुन से युद्ध नहीं कर रहा है। कर्ण सदैव मेरा भला चाहता है। हे गंगापुत्र! आपको ऐसा प्रयत्न करना चाहिए कि अर्जुन मारा जाए।॥37 1/2॥
 
‘Prajanaath! Because of you, even Karna has laid down his arms and is not fighting with Arjuna on the battlefield. Karna always wishes well for me. O son of Ganga! You should make such efforts that Arjuna is killed.'॥ 37 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)