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mahabharat 6.52.26-27h: इन सभी तीखे बाणों से चारों ओर से छिदे होने पर भी महाधनुर्धर एवं पराक्रमी अर्जुन को कोई चोट नहीं आई। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो बाणों से कोई पर्वत भेद दिया गया हो।   |   mahabharat अध्याय 6.52: भीष्म और अर्जुनका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 52: भीष्म और अर्जुनका युद्ध  »  श्लोक 26-27h
 
 
श्लोक  6.52.26-27h 
स तैर्विद्धो महेष्वास: समन्तान्निशितै: शरै:॥ २६॥
न विव्यथे महाबाहुर्भिद्यमान इवाचल:।
 
 
अनुवाद
इन सभी तीखे बाणों से चारों ओर से छिदे होने पर भी महाधनुर्धर एवं पराक्रमी अर्जुन को कोई चोट नहीं आई। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो बाणों से कोई पर्वत भेद दिया गया हो।
 
Despite being pierced from all sides by all these sharp arrows, the great archer and powerful Arjuna was not hurt at all. It seemed as if a mountain had been pierced by the arrows. 26 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)