| श्री महाभारत » पर्व 6: भीष्म पर्व » अध्याय 52: भीष्म और अर्जुनका युद्ध » श्लोक 23-26h |
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| | | | श्लोक 6.52.23-26h  | ततो भीष्मो महाराज सर्वलोकमहारथ:॥ २३॥
अर्जुनं सप्तसप्तत्या नाराचानां समाचिनोत्।
द्रोणश्च पञ्चविंशत्या कृप: पञ्चाशता शरै:॥ २४॥
दुर्योधनश्चतु:षष्टॺा शल्यश्च नवभि: शरै:।
सैन्धवो नवभिश्चैव शकुनिश्चापि पञ्चभि:॥ २५॥
विकर्णो दशभिर्भल्लै राजन् विव्याध पाण्डवम्। | | | | | | अनुवाद | | नरेश्वर! तत्पश्चात् विश्वविख्यात भीष्म ने अर्जुन पर सतहत्तर बाण चलाए, द्रोण ने पच्चीस, कृपाचार्य ने पचास, दुर्योधन ने चौसठ, शल्य ने नौ, जयद्रथ ने नौ, शकुनि ने पाँच और विकर्ण ने भल्ल नामक दस बाणों से अर्जुन को बींध डाला। 23—25 1/2॥ | | | | Nareshwar! Thereafter, Bhishma, the world-renowned master, shot seventy-seven arrows at Arjun, Drona shot twenty-five, Kripacharya fifty, Duryodhana sixty-four, Shalyna nine, Jayadratha nine, Shakunni five and Vikarna pierced Arjun with ten arrows named Bhalla. 23—25 1/2॥ | | ✨ ai-generated | | |
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