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mahabharat 6.51.17-18: भूरिश्रवा, शाल, शल्य, पूज्य राजा भगदत्त तथा अवंती के राजकुमार विन्द और अनुविन्द उस सम्पूर्ण सेना के वामपंथ की रक्षा कर रहे थे। सोमदत्तपुत्र भूरि, त्रिगर्तराज सुशर्मा, कम्बोजराज सुदक्षिण, श्रुतायु और अच्युतायु दक्षिणी भाग में स्थित थे और उस सेना की रक्षा कर रहे थे। 17-18॥   |   mahabharat अध्याय 6.51: कौरव-सेनाकी व्यूह-रचना तथा दोनों दलोंमें शंखध्वनि और सिंहनाद   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 51: कौरव-सेनाकी व्यूह-रचना तथा दोनों दलोंमें शंखध्वनि और सिंहनाद  »  श्लोक 17-18
 
 
श्लोक  6.51.17-18 
भूरिश्रवा: शल: शल्यो भगदत्तश्च मारिष:।
विन्दानुविन्दावावन्त्यौ वामं पार्श्वमपालयन्॥ १७॥
सौमदत्ति: सुशर्मा च काम्बोजश्च सुदक्षिण:।
श्रुतायुश्चाच्युतायुश्च दक्षिणं पक्षमास्थिता:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
भूरिश्रवा, शाल, शल्य, पूज्य राजा भगदत्त तथा अवंती के राजकुमार विन्द और अनुविन्द उस सम्पूर्ण सेना के वामपंथ की रक्षा कर रहे थे। सोमदत्तपुत्र भूरि, त्रिगर्तराज सुशर्मा, कम्बोजराज सुदक्षिण, श्रुतायु और अच्युतायु दक्षिणी भाग में स्थित थे और उस सेना की रक्षा कर रहे थे। 17-18॥
 
Bhurishrava, Shala, Shalya, respected king Bhagadatta and Avanti's princes Vind and Anuvind were protecting the left wing of that entire army. Somdattputra Bhuri, Trigartaraj Susharma, Kambojraj Sudakshin, Shrutayu and Achyutayu were stationed in the southern part and were protecting that army. 17-18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)