Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.51.14-16: शकुनि ने अपनी सेना सहित द्रोणाचार्य की रक्षा में सहयोग दिया। तत्पश्चात राजा दुर्योधन अपने भाइयों सहित अत्यंत प्रसन्न होकर अश्वतक, विकर्ण, अम्बष्ठ, कोशल, दार्द, शक, क्षुद्रक तथा मालव आदि देशों के योद्धाओं के साथ सुबलपुत्र शकुनि की सेना की रक्षा करने लगा। 14-16 | mahabharat अध्याय 6.51: कौरव-सेनाकी व्यूह-रचना तथा दोनों दलोंमें शंखध्वनि और सिंहनाद । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शकुनिश्च स्वसैन्येन भारद्वाजमपालयत्॥ १४॥
ततो दुर्योधनो राजा सहित: सर्वसोदरै:।
अश्वातकैर्विकर्णैश्च तथा चाम्बष्ठकोसलै:॥ १५॥
दरदैश्च शकैश्चैव तथा क्षुद्रकमालवै:।
अभ्यरक्षत संहृष्ट: सौबलेयस्य वाहिनीम्॥ १६॥
अनुवाद
शकुनि ने अपनी सेना सहित द्रोणाचार्य की रक्षा में सहयोग दिया। तत्पश्चात राजा दुर्योधन अपने भाइयों सहित अत्यंत प्रसन्न होकर अश्वतक, विकर्ण, अम्बष्ठ, कोशल, दार्द, शक, क्षुद्रक तथा मालव आदि देशों के योद्धाओं के साथ सुबलपुत्र शकुनि की सेना की रक्षा करने लगा। 14-16
Shakuni along with his army contributed in the protection of Dronacharya. After that, King Duryodhana along with his brothers became extremely happy and started protecting the army of Shakuniki, the son of Subala along with the warriors of the countries like Ashwataka, Vikarna, Ambashtha, Kosala, Dard, Shaka, Kshudrak and Malava. 14-16
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥