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mahabharat 6.50.43: उनका अद्भुत एवं सुन्दर ध्वज सूर्य के मार्ग में (ऊँचे आकाश में) लहरा रहा था। उसे इन्द्र की आज्ञा से साक्षात् विश्वकर्मा ने बनाया था॥43॥   |   mahabharat अध्याय 6.50: युधिष्ठिरकी चिन्ता, भगवान‍् श्रीकृष्णद्वारा आश्वासन, धृष्टद्युम्नका उत्साह तथा द्वितीय दिनके युद्धके लिये क्रौंचारुणव्यूहका निर्माण   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 50: युधिष्ठिरकी चिन्ता, भगवान‍् श्रीकृष्णद्वारा आश्वासन, धृष्टद्युम्नका उत्साह तथा द्वितीय दिनके युद्धके लिये क्रौंचारुणव्यूहका निर्माण  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  6.50.43 
आदित्यपथग: केतुस्तस्याद्भुतमनोरम:।
शासनात् पुरुहूतस्य निर्मितो विश्वकर्मणा॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
उनका अद्भुत एवं सुन्दर ध्वज सूर्य के मार्ग में (ऊँचे आकाश में) लहरा रहा था। उसे इन्द्र की आज्ञा से साक्षात् विश्वकर्मा ने बनाया था॥43॥
 
Their wonderful and beautiful flag was fluttering in the path of the sun (high in the sky). It was created by Vishwakarma in person on the orders of Indra. 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)