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mahabharat 6.50.40: हे सेनापति! क्रौंचारुण नामक यह सेना समस्त शत्रुओं का नाश करने में समर्थ है; यह सेना देवताओं और दानवों के युद्ध के समय बृहस्पति ने इन्द्र को बताई थी।   |   mahabharat अध्याय 6.50: युधिष्ठिरकी चिन्ता, भगवान‍् श्रीकृष्णद्वारा आश्वासन, धृष्टद्युम्नका उत्साह तथा द्वितीय दिनके युद्धके लिये क्रौंचारुणव्यूहका निर्माण   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 50: युधिष्ठिरकी चिन्ता, भगवान‍् श्रीकृष्णद्वारा आश्वासन, धृष्टद्युम्नका उत्साह तथा द्वितीय दिनके युद्धके लिये क्रौंचारुणव्यूहका निर्माण  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  6.50.40 
व्यूह: क्रौञ्चारुणो नाम सर्वशत्रुनिबर्हण:।
यं बृहस्पतिरिन्द्राय तदा देवासुरेऽब्रवीत्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
हे सेनापति! क्रौंचारुण नामक यह सेना समस्त शत्रुओं का नाश करने में समर्थ है; यह सेना देवताओं और दानवों के युद्ध के समय बृहस्पति ने इन्द्र को बताई थी।
 
O Commander! The formation called Krauncharuna is capable of destroying all enemies; it was told by Brihaspati to Indra during the war between gods and demons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)