श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 50: युधिष्ठिरकी चिन्ता, भगवान‍् श्रीकृष्णद्वारा आश्वासन, धृष्टद्युम्नका उत्साह तथा द्वितीय दिनके युद्धके लिये क्रौंचारुणव्यूहका निर्माण  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  6.50.16 
किं नु कृत्वा हितं मे स्याद् ब्रूहि माधव माचिरम्।
मध्यस्थमिव पश्यामि समरे सव्यसाचिनम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
माधव! मुझे शीघ्र बताओ, मेरा हित किसमें होगा? मैं सव्यसाची अर्जुन को इस युद्ध में उदासीन देख रहा हूँ।
 
Madhava! Tell me quickly, what will be in my best interest? I see Savyasachi Arjuna as if he is indifferent in this war.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)