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श्री महाभारत
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पर्व 6: भीष्म पर्व
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अध्याय 50: युधिष्ठिरकी चिन्ता, भगवान् श्रीकृष्णद्वारा आश्वासन, धृष्टद्युम्नका उत्साह तथा द्वितीय दिनके युद्धके लिये क्रौंचारुणव्यूहका निर्माण
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श्लोक 14
श्लोक
6.50.14
जीवितस्य च शेषेण तपस्तप्स्यामि दुश्चरम्।
न घातयिष्यामि रणे मित्राणीमानि केशव॥ १४॥
अनुवाद
केशव! यदि मैं जीवित रह सकूँ तो कठिन तप करूँगी, किन्तु युद्धभूमि में इन मित्रों को व्यर्थ नहीं मरने दूँगी॥ 14॥
Keshav! If I am able to survive I will undertake difficult penances, but I will not let these friends be killed in vain on the battlefield.॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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