श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 5: पंचमहाभूतों तथा सुदर्शनद्वीपका संक्षिप्त वर्णन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  6.5.18 
आपस्ततोऽन्या विज्ञेया: शेष: संक्षेप उच्यते।
ततोऽन्य उच्यते चायमेनं संक्षेपत: शृणु॥ १८॥
 
 
अनुवाद
इन सबके अतिरिक्त शेष स्थान जल से भरा हुआ समझना चाहिए। इसके अतिरिक्त एक छोटे से भूभाग का उल्लेख है। मैं उस भूभाग का संक्षेप में वर्णन करता हूँ, कृपया उसे सुनिए।॥18॥
 
Apart from all these, the rest of the place should be considered to be filled with water. Apart from this, a small piece of land is mentioned. I will describe that piece briefly, please listen to it.॥ 18॥
 
इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि जम्बूखण्डविनिर्माणपर्वणि सुदर्शनद्वीपवर्णने पञ्चमोऽध्याय:॥ ५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत जम्बूखण्डविनिर्माणपर्वमें सुदर्शनद्वीपवर्णनविषयक पाँचवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५॥

 
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd