Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.49.8-9h: मेरा पुत्र दुर्योधन नीच स्वभाव का है। वह कर्ण और अन्य लोगों का प्रिय है और उसका मन चंचल है। मेरी दृष्टि में वह सभी मनुष्यों में सबसे दुष्ट है (इसीलिए उसके मन में युद्ध की इच्छा है)। संजय! मैं, भीष्म, द्रोणाचार्य, कृपाचार्य और गांधारी - इनमें से कोई भी युद्ध नहीं चाहता था। 8 1/2। | mahabharat अध्याय 6.49: शंखका युद्ध, भीष्मका प्रचण्ड पराक्रम तथा प्रथम दिनके युद्धकी समाप्ति । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रक्षिप्त: सम्मत: क्षुद्र: पुत्रो मे पुरुषाधम:।
न युद्धं रोचयेद् भीष्मो न चाचार्य: कथंचन॥ ८॥
न कृपो न च गान्धारी नाहं संजय रोचये।
अनुवाद
मेरा पुत्र दुर्योधन नीच स्वभाव का है। वह कर्ण और अन्य लोगों का प्रिय है और उसका मन चंचल है। मेरी दृष्टि में वह सभी मनुष्यों में सबसे दुष्ट है (इसीलिए उसके मन में युद्ध की इच्छा है)। संजय! मैं, भीष्म, द्रोणाचार्य, कृपाचार्य और गांधारी - इनमें से कोई भी युद्ध नहीं चाहता था। 8 1/2।
My son Duryodhan is of a mean nature. He is dear to Karna and others and has a fickle mind. In my eyes he is the worst of all men (that is why he has a desire for war in his mind). Sanjay! I, Bhishma, Dronacharya, Kripacharya and Gandhari - none of them wanted war. 8 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥