Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.49.53: हे भरतश्रेष्ठ! उस महासमर में भीष्म का वेग और भी अधिक प्रचण्ड होता जा रहा था। यह देखकर कुन्तीपुत्रों ने अपनी सेनाएँ युद्धभूमि से हटा लीं ॥ 53॥ | mahabharat अध्याय 6.49: शंखका युद्ध, भीष्मका प्रचण्ड पराक्रम तथा प्रथम दिनके युद्धकी समाप्ति । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भीष्मं च समुदीर्यन्तं दृष्ट्वा पार्था महाहवे।
अवहारमकुर्वन्त सैन्यानां भरतर्षभ॥ ५३॥
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! उस महासमर में भीष्म का वेग और भी अधिक प्रचण्ड होता जा रहा था। यह देखकर कुन्तीपुत्रों ने अपनी सेनाएँ युद्धभूमि से हटा लीं ॥ 53॥
O best of the Bharatas! Meanwhile, in that great battle, Bhiṣma's ferocity was becoming more and more fierce. Seeing this, Kunti's sons withdrew their armies from the battlefield. ॥ 53॥
इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि भीष्मवधपर्वणि शङ्खयुद्धे प्रथमदिवसावहारे एकोनपञ्चाशत्तमोऽध्याय:॥ ४९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत भीष्मवधपर्वमें शंखका युद्ध तथा प्रथम दिनके युद्धका उपसंहारविषयक उनचासवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ४९॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥