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mahabharat 6.49.5-6: पहले तो वह अपनी सारी सेना छोड़कर दुर्ग में छिपा रहा, फिर पाण्डवों के पराक्रम से दुर्गम प्रदेश में रहकर शत्रुओं को निरंतर कष्ट देता हुआ सदाचार का पालन करने लगा ॥5-6॥   |   mahabharat अध्याय 6.49: शंखका युद्ध, भीष्मका प्रचण्ड पराक्रम तथा प्रथम दिनके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 49: शंखका युद्ध, भीष्मका प्रचण्ड पराक्रम तथा प्रथम दिनके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 5-6
 
 
श्लोक  6.49.5-6 
सर्वं बलं परित्यज्य दुर्गं संश्रित्य तिष्ठति॥ ५॥
पाण्डवानां प्रतापेन दुर्गं देशं निवेश्य च।
सपत्नान् सततं बाधन्नार्यवृत्तिमनुष्ठित:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
पहले तो वह अपनी सारी सेना छोड़कर दुर्ग में छिपा रहा, फिर पाण्डवों के पराक्रम से दुर्गम प्रदेश में रहकर शत्रुओं को निरंतर कष्ट देता हुआ सदाचार का पालन करने लगा ॥5-6॥
 
First he left his entire army and remained hidden in the fort. Then, due to the power of the Pandavas, he lived in an inaccessible region and started following good conduct while constantly troubling the enemies. ॥ 5-6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)