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mahabharat 6.49.43-44h: हे राजन! सव्यसाची अर्जुन को युद्धभूमि में छोड़कर भीष्म ने सेना से घिरे हुए पांचाल नरेश द्रुपद पर आक्रमण किया और अपने प्रिय सम्बन्धी पर बहुत से बाणों की वर्षा की।   |   mahabharat अध्याय 6.49: शंखका युद्ध, भीष्मका प्रचण्ड पराक्रम तथा प्रथम दिनके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 49: शंखका युद्ध, भीष्मका प्रचण्ड पराक्रम तथा प्रथम दिनके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 43-44h
 
 
श्लोक  6.49.43-44h 
उत्सृज्य समरे राजन् पाण्डवं सव्यसाचिनम्।
अभ्यद्रवत पाञ्चाल्यं द्रुपदं सेनया वृतम्॥ ४३॥
प्रियं सम्बन्धिनं राजन् शरानवकिरन् बहून्।
 
 
अनुवाद
हे राजन! सव्यसाची अर्जुन को युद्धभूमि में छोड़कर भीष्म ने सेना से घिरे हुए पांचाल नरेश द्रुपद पर आक्रमण किया और अपने प्रिय सम्बन्धी पर बहुत से बाणों की वर्षा की।
 
O King! Leaving Savyasachi Arjuna in the battlefield, Bhishma attacked the Panchala King Drupada who was surrounded by the army and showered many arrows on his dear relative.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)