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mahabharat 6.49.4-5h: विराट के उस बुद्धिमान पुत्र श्वेत का अपने पिता से वैर था; अतः पिता के भय और चिंता के कारण श्वेत ने पहले ही पाण्डवों की शरण ले ली थी।   |   mahabharat अध्याय 6.49: शंखका युद्ध, भीष्मका प्रचण्ड पराक्रम तथा प्रथम दिनके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 49: शंखका युद्ध, भीष्मका प्रचण्ड पराक्रम तथा प्रथम दिनके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 4-5h
 
 
श्लोक  6.49.4-5h 
कृतं वैरं सदा तेन पितु: पुत्रेण धीमता॥ ४॥
तस्योद्वेगभयाच्चापि संश्रित: पाण्डवान् पुरा।
 
 
अनुवाद
विराट के उस बुद्धिमान पुत्र श्वेत का अपने पिता से वैर था; अतः पिता के भय और चिंता के कारण श्वेत ने पहले ही पाण्डवों की शरण ले ली थी।
 
That intelligent son of Virata, Shweta, had enmity with his father; therefore, due to the anxiety and fear caused by his father, Shweta had already taken refuge with the Pandavas. 4 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)