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mahabharat 6.49.33: वे सब लोग शंख के सिर पर बाणों की वर्षा करने लगे, मानो ग्रीष्म ऋतु के अंत में वायु द्वारा उड़ाये गये बादल पर्वत पर जल बरसा रहे हों।   |   mahabharat अध्याय 6.49: शंखका युद्ध, भीष्मका प्रचण्ड पराक्रम तथा प्रथम दिनके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 49: शंखका युद्ध, भीष्मका प्रचण्ड पराक्रम तथा प्रथम दिनके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  6.49.33 
ते तु बाणमयं वर्षं शङ्खमूर्ध्नि न्यपातयन्।
निदाघान्तेऽनिलोद्‍धूता मेघा इव नगे जलम्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
वे सब लोग शंख के सिर पर बाणों की वर्षा करने लगे, मानो ग्रीष्म ऋतु के अंत में वायु द्वारा उड़ाये गये बादल पर्वत पर जल बरसा रहे हों।
 
All of them began to shower arrows on Shankha's head, as if the clouds carried by the wind at the end of the summer were pouring water on a mountain. 33.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)