श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 49: शंखका युद्ध, भीष्मका प्रचण्ड पराक्रम तथा प्रथम दिनके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  6.49.21 
तेषां क्रोधं चिन्तयंस्तु अह:सु च निशासु च।
न शान्तिमधिगच्छामि दुर्योधनकृतेन हि।
कथं चाभून्महायुद्धं सर्वमाचक्ष्व संजय॥ २१॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन के कारण पाण्डवों के हृदय में जो क्रोध उत्पन्न हुआ है, उसे सोचकर मुझे न दिन में चैन मिलता है, न रात्रि में। संजय! मुझे बताओ कि वह महान् युद्ध किस प्रकार हुआ॥ 21॥
 
Thinking about the anger in the hearts of the Pandavas because of Duryodhana, I get no peace either during the day or at night. Sanjaya! Tell me how that great war took place.॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)