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mahabharat 6.49.17-18: अर्जुन वैदिक विद्वान, पराक्रम से युक्त, अग्नि और सूर्य के समान तेजस्वी, इन्द्र के अस्त्र-शस्त्रों का ज्ञाता, अपार आत्मविश्वास वाला, बड़े वेग से आक्रमण करने वाला और बड़े-बड़े युद्धों में विजयी है। वह ऐसे अस्त्रों का प्रयोग करता है जिनका स्पर्श मात्र भी वज्र के समान कठोर होता है। महारथी अर्जुन सदैव हाथ में खींची हुई तलवार लिए रहता है और उससे आक्रमण करने के बाद भयंकर गर्जना करता है॥17-18॥   |   mahabharat अध्याय 6.49: शंखका युद्ध, भीष्मका प्रचण्ड पराक्रम तथा प्रथम दिनके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 49: शंखका युद्ध, भीष्मका प्रचण्ड पराक्रम तथा प्रथम दिनके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 17-18
 
 
श्लोक  6.49.17-18 
तथैव वेदविच्छूरो ज्वलनार्कसमद्युति:।
इन्द्रास्त्रविदमेयात्मा प्रपतन् समितिंजय:॥ १७॥
वज्रसंस्पर्शरूपाणामस्त्राणां च प्रयोजक:।
स खड्गाक्षेपहस्तस्तु घोषं चक्रे महारथ:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन वैदिक विद्वान, पराक्रम से युक्त, अग्नि और सूर्य के समान तेजस्वी, इन्द्र के अस्त्र-शस्त्रों का ज्ञाता, अपार आत्मविश्वास वाला, बड़े वेग से आक्रमण करने वाला और बड़े-बड़े युद्धों में विजयी है। वह ऐसे अस्त्रों का प्रयोग करता है जिनका स्पर्श मात्र भी वज्र के समान कठोर होता है। महारथी अर्जुन सदैव हाथ में खींची हुई तलवार लिए रहता है और उससे आक्रमण करने के बाद भयंकर गर्जना करता है॥17-18॥
 
Arjun is a Vedic scholar, full of bravery, as radiant as the fire and the sun, knows the weapons of Indra, has immense self-confidence, attacks with great speed and is victorious in big battles. He uses such weapons whose slightest touch is as hard as thunderbolt. Maharathi Arjun always keeps his sword drawn in his hand and roars fiercely after attacking with it.॥17-18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)