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mahabharat 6.48.95-96h: फिर दूसरे रथ पर बैठकर धनुष को टटोलते हुए गंगापुत्र भीष्म दुःखी मन से मुस्कुराते हुए धीरे-धीरे श्वेत रथ की ओर चले।   |   mahabharat अध्याय 6.48: श्वेतका महाभयंकर पराक्रम और भीष्मके द्वारा उसका वध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 48: श्वेतका महाभयंकर पराक्रम और भीष्मके द्वारा उसका वध  »  श्लोक 95-96h
 
 
श्लोक  6.48.95-96h 
ततोऽन्यं रथमास्थाय धनुर्विस्फार्य दुर्मना:॥ ९५॥
शनकैरभ्ययाच्छ्वेतं गाङ्गेय: प्रहसन्निव।
 
 
अनुवाद
फिर दूसरे रथ पर बैठकर धनुष को टटोलते हुए गंगापुत्र भीष्म दुःखी मन से मुस्कुराते हुए धीरे-धीरे श्वेत रथ की ओर चले।
 
Then sitting on the other chariot and twirling his bow, Ganga's son Bhishma, smiling with a sad heart, slowly walked towards the white chariot. 95 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)