Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 6.48.90-91h: उस समय क्रोध से उसकी आँखें लाल हो रही थीं। वह हाथ में दण्ड लिए यमराज के समान जान पड़ता था। जैसे कोई विशाल जलधारा पर्वत से टकराती है, उसी प्रकार वह गदा लेकर भीष्म की ओर दौड़ा।   |   mahabharat अध्याय 6.48: श्वेतका महाभयंकर पराक्रम और भीष्मके द्वारा उसका वध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 48: श्वेतका महाभयंकर पराक्रम और भीष्मके द्वारा उसका वध  »  श्लोक 90-91h
 
 
श्लोक  6.48.90-91h 
क्रोधेन रक्तनयनो दण्डपाणिरिवान्तक:॥ ९०॥
भीष्मं समभिदुद्राव जलौघ इव पर्वतम्।
 
 
अनुवाद
उस समय क्रोध से उसकी आँखें लाल हो रही थीं। वह हाथ में दण्ड लिए यमराज के समान जान पड़ता था। जैसे कोई विशाल जलधारा पर्वत से टकराती है, उसी प्रकार वह गदा लेकर भीष्म की ओर दौड़ा।
 
At that time his eyes were turning red with anger. He looked like Yamaraja with a stick in his hand. Just like a huge water current hitting a mountain, in the same way he ran towards Bhishma with a mace. 90 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)